कृपया ध्यान दें: कुछ लिंक्स में जानकारी अंग्रेज़ी में हो सकती है।
चाहे आप सोशल मीडिया स्क्रॉल कर रहे हों, कोई ब्लॉग पढ़ रहे हों, कोई YouTube (यूट्यूब) वीडियो देख रहे हों, या फिर ऑनलाइन फ़ोरम ब्राउज़ कर रहे हों, एफिलिएट लिंक आज लगभग हर जगह अपना जलवा बिखेर रहे हैं।
प्रोडक्ट लिंक अक्सर एफिलिएट मार्केटिंग रेफ़रल लिंक होते हैं। जब ये किसी भरोसेमंद क्रिएटर से आते हैं, तो ये नए ग्राहकों को खरीदारी के लिए प्रेरित कर सकते हैं। क्रिएटर्स को अपनी सिफारिश के बदले कमीशन मिलती है।
इस लेख में आप जानेंगे कि अपने पार्टनर्स के लिए एफिलिएट लिंक कैसे बनाएं, और इन लिंक का इस्तेमाल क्रिएटर व पब्लिशर अपने कंटेंट में कैसे कर सकते हैं।
एफिलिएट लिंक क्या होते हैं?
एफिलिएट लिंक एक यूनिक ID (आईडी) वाला URL (यूआरएल) होता है। इसकी मदद से ब्रांड ट्रैफ़िक और कन्वर्शन को सही पार्टनर से जोड़ पाते हैं, ताकि मार्केटिंग पार्टनर्स को कमीशन दी जा सके।
जब कोई एफिलिएट पार्टनर—यानी कि लिंक पोस्ट करने वाला क्रिएटर, इन्फ्लुएंसर, या पब्लिशर—किसी ब्रांड के एफिलिएट मार्केटिंग प्रोग्राम से जुड़ता है, तो उसे ब्रांड की वेबसाइट या प्रोडक्ट पेजों के लिए एक यूनिक लिंक मिलता है। इन लिंक में पार्टनर की अलग एफिलिएट ID (आईडी) होती है, जिससे कन्वर्शन रेट ट्रैक किए जा सकें।
जब कोई संभावित ग्राहक उस लिंक पर क्लिक करता है, तो आपकी साइट पर उसकी विज़िट उस एफिलिएट के नाम पर दर्ज हो जाती है। अगर कोई व्यक्ति उसी एफिलिएट लिंक से प्रोडक्ट खरीदता है, तो ब्रांड उस बिक्री पर एफिलिएट मार्केटर को कमीशन दे देता है। कभी-कभी एफिलिएट लिंक ग्राहक को छूट भी देते हैं, लेकिन हमेशा नहीं। फिर भी, क्रिएटर को कमीशन मिलती है।
ध्यान दें: Federal Trade Commission (फेडरल ट्रेड कमीशन, या FTC) नियमों के तहत यह अनिवार्य है कि एफिलिएट पार्टनर आपके प्रोडक्ट या सेवा से अपने संबंध का खुलासा करें। दूसरे शब्दों में, आपके एफिलिएट्स को यह बताना होता है कि उन्हें लिंक पर कमीशन मिल रही है।
एफिलिएट लिंक का उदाहरण
फिटनेस से लेकर मेकअप तक ब्रांड और क्रिएटर कई इंडस्ट्री में एफिलिएट लिंक का इस्तेमाल करते हैं। कई क्रिएटर्स के लिए ऐसी पार्टनरशिप शुरुआत में साइड हसल होती है, जो आगे चलकर भरोसेमंद पैसिव इनकम का स्रोत बन जाती है।
इस उदाहरण में, क्रिएटर और एफिलिएट मार्केटर @camifromtheinternet Instagram (इंस्टाग्राम) पर फैशन कंटेंट पोस्ट करती हैं, जैसे उस दिन का अपना आउटफ़िट।
इस इंस्टाग्राम वीडियो में वह अप्रैल के अपने कुछ पसंदीदा आउटफ़िट दिखा रही हैं। जब दर्शक उनकी प्रोफ़ाइल होमपेज पर जाकर बायो में दिए लिंक पर क्लिक करते हैं, तो उन्हें एफिलिएट लिंक वाले कई पेजों की सूची दिखाई दे जाती है।
एफिलिएट मार्केटिंग प्लेटफ़ॉर्म ShopMy (शॉपमाय) पर उनके प्रोडक्ट राउंडअप में दर्शक अप्रैल आउटफ़िट वीडियो में दिखाए गए अलग-अलग प्रोडक्ट खरीद सकते हैं।

जब आप इस राउंडअप में किसी प्रोडक्ट पर क्लिक करते हैं, तो आपको ब्रांड की वेबसाइट पर भेज दिया जाता है। उदाहरण के लिए, काउबॉय बूट्स पर क्लिक करने से आप Tecovas (टेकोवास) की वेबसाइट पर पहुँच जाते हैं।

अगर आप किसी ऐसे एफिलिएट लिंक पर क्लिक करके अपनी ब्राउज़र बार देखें, तो आपको UTM (यूटीएम) पैरामीटर के रूप में ट्रैकिंग जानकारी दिखाई दे जाएगी। इस उदाहरण में, ये पैरामीटर बताते हैं कि:
- एफिलिएट इस खास क्रिएटर के साथ पार्टनरशिप से आया था (utm_campaign=Camila+Perez+Downey)
- लिंक ShopMy (शॉपमाय) पर पोस्ट किया गया था (utm_referrer=shopmy.us)
- ट्रैफिक लाने वाला कंटेंट क्रिएटर का अप्रैल फ़ेवरेट्स राउंडअप था (utm_content=April+Faves+-+From+my+Closet)
एफिलिएट मार्केटिंग क्या है?
एफिलिएट मार्केटिंग रेफ़रल मार्केटिंग का एक तरीका होता है। इसमें एफिलिएट पार्टनर किसी बिज़नेस, आमतौर पर किसी रिटेलर, की ओर से प्रोडक्ट या सेवा का प्रचार करके कमीशन कमाते हैं। यह काम एफिलिएट लिंक के ज़रिए होता है। Amazon Associates (अमेज़न एसोसिएट्स) जैसे बड़े-बड़े प्रोग्राम भी इसी मॉडल पर चलते हैं।
खास नतीजे हासिल करने पर कंपनी एफिलिएट पार्टनर को भुगतान करती है, जैसे क्लिक और कन्वर्शन। उदाहरण के लिए, जब कोई वेबसाइट विज़िटर किसी न्यूज़लेटर के लिए साइन-अप करता है या फिर कोई भुगतान करता है।
एफिलिएट मार्केटिंग कई चैनलों के ज़रिए की जाती है। इनमें TikTok (टिकटॉक) वीडियो कंटेंट, ईमेल मार्केटिंग, ब्लॉग, और पॉडकास्ट शामिल हैं। कई क्रिएटर्स के लिए तो यह उनके ऑनलाइन बिज़नेस की मुख्य कमाई का स्रोत होती है।
4 चरणों में एफिलिएट लिंक कैसे बनाएँ
- अपने एफिलिएट टूल में लॉग-इन कर लें
- एफिलिएट्स जोड़ें
- यूनिक एफिलिएट लिंक बनाएं
- URL (यूआरएल) को कस्टमाइज़ करें
एफिलिएट लिंक का सही इस्तेमाल आपके बिज़नेस की पहुँच बढ़ाकर नई कमाई ला सकता है। एफिलिएट लिंक कैसे बनाएं, ये जानने के लिए इन स्टेप्स को फ़ॉलो करें:
1. अपने एफिलिएट टूल में लॉग-इन कर लें
अपने एफिलिएट मैनेजमेंट ऐप या टूल में लॉग-इन कर लें। यहाँ आप एफिलिएट कमीशन रेट तय कर सकते हैं, लिंक बना सकते हैं, और हर क्रिएटर की परफ़ॉर्मेंस ट्रैक कर सकते हैं। कई टूल ट्रैकिंग और पेआउट तेज़ करने के लिए ऑटोमेशन भी देते हैं।
क्या आप अभी शुरू करने जा रहे हैं? हमारा ट्यूटोरियल देखकर जानें कि अपने ब्रांड के लिए एफिलिएट प्रोग्राम कैसे सेट-अप किए जा सकते हैं।
2. एफिलिएट्स जोड़ें
अपने प्रोग्राम में एफिलिएट्स जोड़ें। UpPromote (अपप्रोमोट) जैसे एफिलिएट मैनेजमेंट प्लेटफ़ॉर्म बड़े-बड़े एफिलिएट नेटवर्क देते हैं, जहाँ आप नए पार्टनर्स खोज सकते हैं।
नाम और मार्केट नीश के आधार पर खोजें, ताकि आप ऐसे एफिलिएट चुन सकें, जो आपके प्रोडक्ट या सेवा के लिए अच्छे एम्बेसडर साबित हों।
आपके साथ काम करने वाले एफिलिएट्स को एक एफिलिएट डैशबोर्ड मिलता है। इसके चलते दोनों पक्ष आपकी एफिलिएट मार्केटिंग रणनीति पर एकमत रह पाते हैं।
3. यूनिक एफिलिएट लिंक बनाएं
इस बात का फैसला करने के बाद कि आप किन क्रिएटर्स के साथ काम कर रहे हैं, अब समय है एफिलिएट लिंक बनाने का। अगर आप UpPromote (अपप्रोमोट) जैसे प्लेटफ़ॉर्म का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो लिंक जनरेटर हर पार्टनर के लिए अपने आप लिंक बना देगा।
आपको यह तय करना होगा कि आप खास प्रोडक्ट्स के लिए एफिलिएट लिंक चाहते हैं या फिर पूरे स्टोर के लिए। दूसरे शब्दों में, आप यह तय करते हैं कि किन प्रोडक्ट्स पर कमीशन दी जाएगी।
4. URL (यूआरएल) को कस्टमाइज़ करें
आपके लिंक में एफिलिएट से जुड़ी जानकारी अपने आप शामिल हो जाती है, लेकिन अतिरिक्त एनालिटिक्स के लिए आप UTMs (यूटीएम्स) जोड़ सकते हैं। उदाहरण के लिए, किसी खास कैंपेन या किसी खास लैंडिंग पेज की सफलता ट्रैक करने के लिए आप “utm_source = campaign name” जोड़ सकते हैं।
एफिलिएट ट्रैकिंग के लिए आम UTM (यूटीएम) पैरामीटर ये हैं:
- utm_source=affiliate: यह बताता है कि ट्रैफ़िक एफिलिएट से आया है
- utm_medium=influencer या utm_medium=blog: इससे अलग-अलग तरह के पार्टनर्स का फर्क पता चलता है
- utm_campaign=summer2026 या utm_campaign=[affiliate_name]: यह खास कैंपेन या पार्टनर ट्रैक करता है
- utm_content=instagram_bio या utm_content=youtube_description: यह दिखाता है कि लिंक कहाँ डाला गया था
पूरा एफिलिएट URL (यूआरएल) कुछ ऐसा दिख सकता है:
yourstore.com/products/bestseller?utm_source=affiliate&utm_medium=influencer&utm_campaign=jane_smith&utm_content=instagram_story
प्रोडक्ट पेजों के लिए ज़्यादातर ऑटो-जनरेटेड URL (यूआरएल) अक्षरों और अंकों की रैंडम स्ट्रिंग जैसे दिखते हैं। UTM (यूटीएम) पैरामीटर से ये स्ट्रिंग और भी लंबी हो जाती हैं।
यूनिक URLs (यूआरएल्स) ब्रांडेड, साफ़-सुथरे, और एक जैसे होने चाहिए। साथ ही, ये हर क्रिएटर के लिए पर्सनलाइज़ भी किए जाने चाहिए। इससे लिंक इस्तेमाल करने में आसान लगते हैं और अलग-अलग पार्टनरशिप में ब्रांडिंग भी एक समान रहती है।
टिप: कई UTM (यूटीएम) पैरामीटर वाले लंबे URL (यूआरएल) भरे-भरे लग सकते हैं और उनसे क्लिक-थ्रू रेट कम हो सकते हैं। Bitly (बिटली) या Pretty Links (प्रिटी लिंक्स) जैसे टूल आपको साफ़-सुथरे और ब्रांडेड शॉर्ट लिंक बनाने की सहूलियत देते हैं। और तो और, इनमें पूरी ट्रैकिंग जानकारी भी सुरक्षित रहती है।
उदाहरण के लिए, एथलेटिक वियर कंपनी Gymshark (जिमशार्क) John (जॉन) नाम के क्रिएटर के लिए “gymshark.com/john20” जैसा लिंक इस्तेमाल कर सकती है। यानी कि इस लिंक से खरीदारी करने वाले ग्राहकों को 20% का डिस्काउंट मिलेगा। वहीं Lindsay (लिंड्सी) नाम की क्रिएटर के लिए कंपनी “gymshark.com/lindsay20” लिंक बना सकती है।
एफिलिएट लिंक इस्तेमाल करने के 6 फायदे
- ब्रांड पर भरोसा बढ़ता है
- एफिलिएट मार्केटिंग की बढ़ती संभावनाएँ
- ज़्यादा जवाबदेही
- रिश्ते मज़बूत करने का मौका
- इस्तेमाल में आसान और असरदार
- SEO (एसईओ) में संभावित सुधार
एफिलिएट मार्केटिंग का इस्तेमाल ब्रांड रणनीतिक और स्वाभाविक ढंग से अपने ग्राहक आधार में बढ़ोतरी लाने के लिए करते हैं। एफिलिएट लिंक से आपके ब्रांड को ये फायदे हो सकते हैं:
1. ब्रांड पर भरोसा बढ़ता है
सफल एफिलिएट मार्केटिंग से ब्रांड ट्रस्ट बनाने की प्रक्रिया तेज़ हो जाती है। वह इसलिए क्योंकि एफिलिएट पार्टनर और ग्राहक के बीच पहले से ही एक रिश्ता होता है। जब ग्राहक किसी भरोसेमंद व्यक्ति को आपके ब्रांड का प्रचार करते देखते हैं, तो उनके आपके प्रोडक्ट खरीदने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
2. एफिलिएट मार्केटिंग की बढ़ती संभावनाएँ
एफिलिएट मार्केटिंग इंडस्ट्री लगातार फल-फूल रही है। Cognitive Market Research (कॉग्निटिव मार्केट रिसर्च) की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में इस सेक्टर की वैल्यूएशन 18 अरब डॉलर थी। 2033 तक इसके 8.5% के compound annual growth rate (कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट, या CAGR) से बढ़ने का अनुमान है।
इस बढ़त की एक बड़ी वजह इन्फ्लुएंसरों की सिफारिशों पर ग्राहकों का भरोसा है। इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग कंपनी Traackr (ट्रैकर) के एक अध्ययन में ये बातें पाई गईं:
- 63% ग्राहकों ने माना कि इन्फ्लुएंसर पोस्ट खरीदारी के उनके फ़ैसलों को कुछ हद तक प्रभावित करते हैं।
- 48% ग्राहकों ने कहा कि प्रोडक्ट सिफारिशों के लिए वे इन्फ्लुएंसर्स की ओर देखते हैं।
3. ज़्यादा जवाबदेही
सामान्य इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग पार्टनरशिप में आसानी से न मिलने वाले मेट्रिक्स का एफिलिएट प्रोग्राम आपको एक्सेस दे सकते हैं। सामान्य पार्टनरशिप के तहत आप सिर्फ इन्फ्लुएंसर्स को प्रोडक्ट भेज देते हैं या फिर प्रमोशन के लिए पहले से भुगतान कर देते हैं।
एफिलिएट मार्केटिंग के साथ ब्रांड एफिलिएट लिंक से सेल्स एनालिटिक्स और ट्रैफ़िक डेटा हासिल किए जा सकते हैं। इससे आप बड़े स्तर की जानकारी भी जुटा सकते हैं।
उदाहरण के लिए, UpPromote (अपप्रोमोट) जैसा एफिलिएट मार्केटिंग प्लेटफ़ॉर्म आपको कैंपेन का रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट (ROI) दिखाता है। इससे आप अपनी एफिलिएट सेल्स को दी जा रही कमीशन और अन्य रिवॉर्ड्स के साथ ट्रैक कर सकते हैं। इसके चलते यह सुनिश्चित करना आसान हो जाता है कि आप सही कमीशन रेट तय कर रहे हैं।
एफिलिएट प्रोग्राम्स से आपको अलग-अलग एफिलिएट्स की परफ़ॉर्मेंस की स्पष्ट जानकारी मिल जाती है।
Shopify (शॉपिफाई) की सीनियर प्रोडक्ट लीड Lizzy Masotta (लिज़ी मसोट्टा) का कहना है, “आपको अपने टॉप क्रिएटर्स पर नज़र रखनी चाहिए। अगर कोई क्रिएटर आपके लिए बहुत अच्छा परफॉर्म कर रहा है, तो आपको उन्हें अपने साथ बनाए रखकर यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि उन्हें इंसेंटिव मिलते रहें, ताकि वे बढ़-चढ़कर आपके ब्रांड को प्रमोट करना जारी रखें।”
4. रिश्ते मज़बूत करने का मौका
कस्टम लिंक एफिलिएट्स और ब्रांड, दोनों के लिए फ़ायदेमंद होते हैं। बिज़नेस को क्रिएटर की ऑडियंस का एक्सेस मिल जाता है। इससे ट्रैफ़िक और कन्वर्शन बढ़ते हैं, जबकि एफिलिएट मार्केटर की कमीशन से कमाई हो जाती है।
इससे ब्रांड पार्टनर्स के बीच रिश्ते मज़बूत होते हैं और बेहतरीन क्रिएटर्स के साथ लंबी पार्टनरशिप बन सकती है। यह क्रिएटर्स को आपके प्रोडक्ट्स के बारे में पोस्ट करते रहने के लिए भी प्रेरित करता है, क्योंकि हर बिक्री पर उन्हें कमीशन जो मिलती है।
5. इस्तेमाल में आसान और असरदार
एफिलिएट मार्केटिंग की शुरुआती लागत कम होती है, इसलिए संभावित ROI (आरओआई) ज़्यादा हो सकती है। आपको न तो किसी विज्ञापन एजेंसी को काम पर रखना पड़ता है और न ही कोई विज्ञापन स्पेस खरीदना पड़ता है।
अपने प्रोडक्ट या सेवाओं के प्रचार के लिए आप अपने एफिलिएट पार्टनर्स पर भरोसा कर सकते हैं। उन्हें आप तभी भुगतान करते हैं, जब वे कोई बिक्री लाते हैं।
कई कंपनियाँ सोर्सिंग, मैनेजमेंट, और पेमेंट संभालने के लिए UpPromote (अपप्रोमोट) जैसे software-as-a-service (सॉफ्टवेयर एज़ अ सर्विस, या SaaS) टूल का इस्तेमाल करती हैं। इससे यह प्रक्रिया नए और अनुभवी, दोनों तरह के यूज़र्स के लिए कहीं ज़्यादा आसान हो जाती है।
6. SEO (एसईओ) में संभावित सुधार
एफिलिएट लिंक सीधे आपके search engine optimization (सर्च इंजन ऑप्टिमाइज़ेशन, या SEO) में सुधार नहीं लाते। वह इसलिए क्योंकि सर्च इंजन आमतौर पर इन्हें आपकी रैंकिंग में सुधार लाने वाले सामान्य बैकलिंक की तरह नहीं देखते।
फिर भी, अगर ब्लॉगर ऐसी साइट चलाते हों, जिनमें प्रासंगिक और हाई-क्वालिटी कंटेंट हो, तो एफिलिएट मार्केटिंग कंटेंट आपकी वेबसाइट के SEO (एसईओ) को फ़ायदा पहुँचा सकता है। इनमें एफिलिएट लिंक वाले प्रोडक्ट राउंडअप या रिव्यू आ जाते हैं। ऐसा कंटेंट आपकी साइट पर ट्रैफ़िक लाने में मदद करता है, जिससे सर्च इंजन को प्रासंगिकता का संकेत जाता है।
ध्यान रखें, यह बात सिर्फ ब्लॉग्स पर ही लागू होती है। सोशल मीडिया कंटेंट आपकी साइट की सर्च रैंकिंग बढ़ाने का ज़्यादा असरदार तरीका नहीं है।
आपके बिज़नेस को एक एफिलिएट प्रोग्राम की ज़रूरत है
ई-कॉमर्स ट्रैफिक बढ़ाने, बिक्री में बढ़ोतरी लाने, मार्केटिंग कैंपेन को सपोर्ट करने, और ब्रांड जागरूकता बढ़ाने का एफिलिएट प्रोग्राम एक कारगर तरीका होते हैं। कम या लगभग न बराबर मार्केटिंग लागत के साथ, एफिलिएट प्रोग्राम शुरू करना अपेक्षाकृत आसान होता है।
मुख्य चरणों में अपनी नीश मार्केट की पहचान करना, अपने ब्रांड के लिए सही एफिलिएट ढूँढना (या किसी एफिलिएट नेटवर्क के साथ काम करना), और आपके बिज़नेस के लिए आय और आपके एफिलिएट्स के लिए कमीशन जेनरेट करने वाले एफिलिएट लिंक बनाना शामिल है।
एफिलिएट लिंक कैसे बनाएं — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मैं एफिलिएट प्रोग्राम कैसे बना सकता हूँ?
अगर आप अपने बिज़नेस के लिए एफिलिएट मार्केटिंग शुरू करना चाहते हैं, तो इन स्टेप्स को फ़ॉलो करें:
- अपने एफिलिएट प्रोग्राम के लक्ष्य तय कर लें।
- कोई एफिलिएट मार्केटिंग टूल चुन लें।
- एफिलिएट्स को जोड़ दें।
- सही प्रोडक्ट चुन लें।
- कमीशन रेट तय कर लें।
- कुकी की अवधि तय कर लें।
- गिफ्टिंग रणनीति तय कर लें।
- प्रमोशन तैयार कर लें।
- एफिलिएट संबंधों को मैनेज करें।
- परफ़ॉर्मेंस ट्रैक करके उसे मापना शुरू कर दें।
रेफ़रल और एफिलिएट में क्या फर्क होता है?
रेफ़रल मार्केटिंग में ग्राहकों को तब रिवॉर्ड दिया जाता है, जब वे अपने दोस्तों और परिवार को आपका प्रोडक्ट या सेवा आज़माने के लिए आमंत्रित करते हैं। रेफ़रल प्रोग्राम में भाग लेने के लिए ये ज़रूरी नहीं कि उनके पास ब्लॉग या सोशल मीडिया फ़ॉलोइंग जैसा कोई प्लेटफ़ॉर्म हो। दूसरी ओर, एफिलिएट मार्केटिंग में थर्ड-पार्टी ब्रांड एंबेसडर आपके प्रोडक्ट्स का प्रचार करते हैं और कमीशन के बदले ग्राहकों को आपके बिज़नेस तक लाते हैं।
एफिलिएट्स को जोड़ने के लिए अच्छी रणनीति क्या है?
एफिलिएट्स को जोड़ने के लिए ये रणनीतियाँ कारगर साबित होती हैं:
- UpPromote (अपप्रोमोट) जैसे किसी एफिलिएट नेटवर्क को जॉइन कर लें।
- अपनी वेबसाइट पर अपने एफिलिएट मार्केटिंग प्रोग्राम को प्रमोट करें।
- सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर अपने प्रोग्राम को प्रमोट करें।
इस बारे में और जानने के लिए आप इस वीडियो को देख सकते हैं। ज़रूरत पड़ने पर हिंदी सबटाइटल्स ऑन कर लें (ऑटो ट्रांसलेट)।

