कृपया ध्यान दें: कुछ लिंक में जानकारी अंग्रेज़ी में हो सकती है।
किस वजह से किसी ग्राहक ने आपसे खरीदारी की?
यह एक सीधा-सा सवाल है, लेकिन जैसे-जैसे आप इसकी गहराई में जाते हैं, इसका जवाब देना उतना ही मुश्किल होता जाता है।
क्या उन्होंने Instagram Reel, YouTube Shorts या Facebook पोस्ट देखा, गूगल पर आपके प्रोडक्ट को सर्च किया, या कोई प्रमोशनल ईमेल खोला?
आपका बिज़नेस जितना बड़ा होता जाता है, मार्केटिंग एट्रिब्यूशन उतना ही जटिल बनता जाता है, क्योंकि इसमें वेबसाइट, सोशल मीडिया अकाउंट, इन्फ्लुएंसर प्रोग्राम, ऑफ़लाइन इंटरैक्शन और कई दूसरे टचपॉइंट शामिल होते हैं। और जैसे-जैसे समय के साथ उपभोक्ताओं का व्यवहार बदलता है, यह और भी पेचीदा हो जाता है।
हालांकि यह कोई पूरी तरह सटीक विज्ञान नहीं है, फिर भी ग्राहक की यात्रा में आप जितना अधिक मार्केटिंग एट्रिब्यूशन डेटा देख पाते हैं, अपने बिज़नेस के लिए उतने ही बेहतर फ़ैसले ले सकते हैं। आगे आप मार्केटिंग एट्रिब्यूशन की बुनियादी बातें, अलग-अलग एट्रिब्यूशन मॉडल, और अपने मार्केटिंग चैनलों को प्रभावी ढंग से ट्रैक और मापने के तरीके सीखेंगे।
विषय-सूची
- मार्केटिंग एट्रिब्यूशन क्या है?
- बेहतर एट्रिब्यूशन की नींव रखना
- 7 मार्केटिंग एट्रिब्यूशन मॉडल
- प्लेटफ़ॉर्म के बीच एट्रिब्यूशन में अंतर
मार्केटिंग एट्रिब्यूशन क्या है?
मार्केटिंग एट्रिब्यूशन आपके मार्केटिंग चैनलों के प्रदर्शन का मूल्यांकन और ट्रैकिंग करने की प्रक्रिया है।
मार्केटिंग एट्रिब्यूशन का मकसद यह स्पष्ट रूप से समझना है कि कन्वर्ज़न तक पहुँचने के रास्ते में ग्राहकों के आपके ब्रांड के साथ कौन-कौन से अलग-अलग इंटरैक्शन और टचपॉइंट होते हैं।
इससे आप उन चैनलों और खास कैम्पेन को श्रेय दे पाते हैं जो किसी कन्वर्ज़न में योगदान करते हैं, और इससे आपको यह समझने में मदद मिलती है कि अपना पैसा और ध्यान कहाँ और कैसे लगाना चाहिए।
ध्यान दें: इस लेख में बताए गए Meta Pixel, Google Analytics 4 (GA4), Google Ads, Conversion Tracking और अन्य मार्केटिंग टूल समय-समय पर अपडेट हो सकते हैं। इनके फीचर आपके Shopify प्लान, क्षेत्र, विज्ञापन प्लेटफ़ॉर्म और स्थानीय डेटा गोपनीयता नियमों के अनुसार अलग हो सकते हैं। साथ ही, इस लेख में दिए गए कई उदाहरण अमेरिका और यूरोप के बाज़ारों पर आधारित हैं और इन्हें केवल जानकारी व समझाने के उद्देश्य से शामिल किया गया है। भारतीय व्यापारियों को अपनी स्थानीय आवश्यकताओं, नियमों और बाज़ार के अनुसार इनका उपयोग और मूल्यांकन करना चाहिए। नवीनतम जानकारी के लिए संबंधित प्लेटफ़ॉर्म के आधिकारिक दस्तावेज़ देखें।
मार्केटिंग एट्रिब्यूशन क्यों लगातार मुश्किल होता जा रहा है

सिद्धांत रूप में मार्केटिंग एट्रिब्यूशन की परिभाषा भले ही सीधी लगे, लेकिन असल में अपने मार्केटिंग टचपॉइंट को प्रभावी ढंग से ट्रैक करना काफ़ी जटिल हो सकता है। जैसे-जैसे तकनीक आगे बढ़ती है और उपभोक्ता रुझान बदलते हैं, वैसे-वैसे एट्रिब्यूशन ट्रैक करने के तरीके भी बदलते हैं। इन बातों पर विचार करें:
- हम एक मल्टी-डिवाइस दुनिया में रहते हैं। कई लोगों के पास एक से ज़्यादा स्मार्टफ़ोन, लैपटॉप, टैबलेट या ऑफिस और घर में इस्तेमाल होने वाले अलग-अलग डिवाइस होते हैं। ऐसे में एक ही ग्राहक अलग-अलग डिवाइस से आपकी वेबसाइट पर आ सकता है। इनमें से हर एक आपकी साइट पर एक अलग विज़िटर के रूप में दिख सकता है, जबकि असल में ये सभी एक ही ग्राहक से जुड़े होते हैं।
- दुनिया प्राइवेसी और ट्रैकिंग को लेकर सख़्त होती जा रही है। डिवाइस और ब्राउज़र अब इस बारे में ज़्यादा सतर्क रहते हैं कि वे कौन-सी यूज़र जानकारी और ट्रैकिंग को स्टोर करने की अनुमति देते हैं। GDPR जैसे वैश्विक डेटा प्राइवेसी नियमों के साथ-साथ भारत के Digital Personal Data Protection (DPDP) Act जैसे डेटा सुरक्षा नियमों के कारण, उपभोक्ताओं की सहमति (Consent) और डेटा ट्रैकिंग को लेकर नियम लगातार सख्त हो रहे हैं।
- ज़्यादातर एट्रिब्यूशन मॉडल क्लिक-आधारित होते हैं। चूँकि अधिकांश एट्रिब्यूशन और रिपोर्टिंग क्लिक-आधारित व्यवहार और UTM ट्रैकिंग पर आधारित होती है (जैसा कि हम नीचे बताएँगे), इसलिए यह उन विज्ञापनों या कंटेंट को देखने, मगर उन पर क्लिक न करने, के असर को नज़रअंदाज़ कर देती है।

बेहतर एट्रिब्यूशन की नींव रखना
इससे पहले कि हम बात करें कि एट्रिब्यूशन कैसे काम करता है या अलग-अलग मार्केटिंग एट्रिब्यूशन मॉडल क्या हैं, हमें एक बात साफ़ करनी होगी: 100% "सच्चा" मार्केटिंग एट्रिब्यूशन जैसी कोई चीज़ नहीं होती।
आप कभी भी पूरी तरह से ठीक-ठीक नहीं समझ सकते कि हर मार्केटिंग टचपॉइंट ने हर ग्राहक की यात्रा को अलग-अलग रूप से कैसे प्रभावित किया, चाहे आप सबसे बढ़िया मार्केटिंग एट्रिब्यूशन सॉफ़्टवेयर ही क्यों न इस्तेमाल कर रहे हों। सभी मार्केटिंग एट्रिब्यूशन मॉडल और टूल असल दुनिया का केवल एक अनुमान भर होते हैं।
आप केवल इन बातों में सटीकता के लिए प्रयास कर सकते हैं:
- पिक्सेल और कन्वर्ज़न ट्रैकिंग को सही ढंग से सेट करना (जैसे कि मेटा पिक्सेल, गूगल ऐड्स कन्वर्ज़न ट्रैकिंग, और गूगल एनालिटिक्स में गोल/इवेंट)
- UTM (Urchin Tracking Module) टैगिंग और ट्रैकिंग के लिए एक सुसंगत प्रणाली बनाना जो आपके ग्राहकों की यात्रा के बारे में साफ़ और संपूर्ण डेटा को प्राथमिकता दे
- अलग-अलग एट्रिब्यूशन मॉडलों के दृष्टिकोण को समझना और यह कि वे आपके मार्केटिंग फ़ैसलों को कैसे प्रभावित करते हैं
UTM पैरामीटर के बारे में
UTM पैरामीटर "?" या "&" से शुरू होने वाले लेबलों की एक श्रृंखला है, जो आपको किसी URL के बाद दिख सकती है:
www.yourstore.com?utm_source=facebook&utm_medium=cpc
भले ही यह देखने और सुनने में अनजाना लगे, लेकिन UTM डिजिटल मार्केटिंग में टैगिंग की एक मानकीकृत प्रणाली है। टैग बनाना काफ़ी आसान है, इसके लिए आप गूगल के अपने Campaign URL Builder या UTM.io जैसे क्रोम एक्सटेंशन का इस्तेमाल कर सकते हैं। गूगल का Campaign URL Builder स्वतः ही स्पेस या प्रश्नचिह्न जैसे विशेष कैरेक्टर को एनकोड कर देता है, जो वरना आपके URL को खराब कर सकते हैं।
एनालिटिक्स टूल के लिए आने वाले ट्रैफ़िक का वर्णन करने के लिए पाँच मानक प्रकार के UTM पैरामीटर इस्तेमाल किए जा सकते हैं, ताकि उन्हें समूहों में बाँटा, व्यवस्थित और विश्लेषित किया जा सके।
आप चुन सकते हैं कि इन्हें कब और कैसे इस्तेमाल करना है, लेकिन अपनी UTM लेबलिंग और ट्रैकिंग में सुसंगत रहना सुनिश्चित करें:
- कैम्पेन सोर्स (utm_source) उस वेबसाइट या मुख्य स्रोत का वर्णन करता है जहाँ लिंक रखा जाएगा (उदाहरण के लिए, अगर मैं अपने स्टोर का लिंक इंस्टाग्राम बायो में प्रमोट कर रहा हूँ और बहुत सारी सोशल मीडिया मार्केटिंग करता हूँ, तो मैं इसे utm_source=instagram टैग कर सकता हूँ)।
- कैम्पेन मीडियम (utm_medium) मार्केटिंग गतिविधि का वर्णन करता है (उदाहरण के लिए, अगर मैं किसी गूगल ऐड्स कैम्पेन से आने वाले ट्रैफ़िक को ट्रैक करने के लिए लिंक का इस्तेमाल कर रहा हूँ, तो मैं इसे utm_medium=cpc लेबल कर सकता हूँ ताकि आपको पता चले कि यह कॉस्ट-पर-क्लिक विज्ञापन से है)।
- कैम्पेन नाम (utm_campaign) आपको किसी खास कैम्पेन से आने वाले ट्रैफ़िक की पहचान करने देता है, भले ही वह एक ही स्रोत से क्यों न हो (उदाहरण के लिए, किसी ब्रांडेड सर्च कैम्पेन के लिए, आप utm_campaign=branded%20search%20exact का इस्तेमाल कर सकते हैं। URL को खराब होने से बचाने के लिए स्पेस को "%20" के रूप में एनकोड किया जा सकता है)।
- कैम्पेन टर्म (utm_term) का इस्तेमाल उन खास कीवर्ड को ट्रैक करने के लिए किया जाता है जिन्हें आप तब टारगेट कर रहे होते हैं जब आप कोई गूगल ऐड्स कैम्पेन चला रहे हों।
- कैम्पेन कंटेंट (utm_content) तब उपयोगी होता है जब आप विज्ञापनों की स्प्लिट टेस्टिंग कर रहे हों। इस मामले में, आप हर विज्ञापन को ट्रैक करके देख सकते हैं कि ट्रैफ़िक लाने में कौन सबसे प्रभावी रहा।
कस्टम UTM पैरामीटर
आप अपने ट्रैफ़िक को और भी बारीकी से वर्गीकृत करने के लिए अपने खुद के कस्टम UTM पैरामीटर भी बना सकते हैं। किसी खास मौसमी कैम्पेन को ट्रैक करने के लिए आप "utm_season=fall" का इस्तेमाल कर सकते हैं।
इसके अलावा, आप अलग-अलग मार्केटिंग कैम्पेन सेटिंग या यूज़र विशेषताओं को डायनेमिक रूप से टैग करने के लिए किसी भी valuetrack पैरामीटर का इस्तेमाल कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, &utm_device={device} स्वतः ही {device} को बदलकर यह पहचान लेगा कि कोई यूज़र किस ब्राउज़र से आपकी साइट पर आ रहा है।
यह कैसा दिखता है, इसका एक उदाहरण यहाँ दिया गया है। अगर मैं गैर-ब्रांडेड कीवर्ड "winter jackets" को टारगेट करके विंटर जैकेट्स के लिए एक गूगल ऐड्स सर्च कैम्पेन से ट्रैफ़िक और बिक्री ट्रैक करना चाहूँ, तो UTM ट्रैकिंग के साथ मेरा URL कुछ ऐसा दिख सकता है:
www.mystore.com?utm_source=google&utm_medium=cpc&utm_campaign=nonbranded%20search%20winter%20jackets&utm_term=winter%20jackets
इसे तोड़कर देखें, तो हर पैरामीटर आपको ट्रैफ़िक के बारे में कुछ बताता है:
- सोर्स: Google
- मीडियम: CPC (कॉस्ट पर क्लिक)
- कैम्पेन: विंटर जैकेट्स का विज्ञापन करने वाला गैर-ब्रांडेड सर्च कैम्पेन
- टर्म: कीवर्ड "winter jackets" पर बोली लगाना
UTM आपको अपने ट्रैफ़िक को खास स्रोतों तक ट्रैक करने में मदद करते हैं, ताकि आप ज़्यादा बारीकी से विश्लेषण कर सकें कि वह कैसा प्रदर्शन करता है, लेकिन केवल तभी जब आप निम्नलिखित बातों का ध्यान रखें:
- UTM व्यक्तिपरक होते हैं और आपके द्वारा परिभाषित किए जाते हैं। भले ही अपने UTM के नाम रखने के लिए कुछ आम तरीके होते हैं, फिर भी वही इस्तेमाल करें जो आपके लिए सही लगे। जब तक आप सुसंगत रहते हैं और आपकी टीम के लिए यह समझना आसान है कि आप क्या इस्तेमाल कर रहे हैं, तब तक आप बढ़िया स्थिति में रहेंगे।
- UTM पैरामीटर केस-सेंसिटिव होते हैं। "utm_source=Facebook" और "utm_source=facebook" गूगल एनालिटिक्स में दो अलग-अलग स्रोतों के रूप में दिखेंगे।
- अपने पैरामीटर का रिकॉर्ड रखें। अपने UTM पैरामीटर को रिकॉर्ड करने के लिए एक सुसंगत प्रणाली बनाएँ, ताकि आप और आपकी टीम को पता रहे कि कौन-कौन से इस्तेमाल में हैं और जब आप उन्हें देखें तो उनका मतलब समझ सकें।
- अपने टैग में सुसंगत रहें। किसी भी नए टीम सदस्य को अपनी UTM प्रणाली से परिचित कराएँ और इस्तेमाल करने से पहले अपने UTM की दोबारा जाँच करें।
- अपने अंतिम URL की जाँच करें। कभी-कभी आपका अंतिम URL खराब हो सकता है। विज्ञापनों पर पैसा खर्च करने से पहले अपने लैंडिंग पेज की दोबारा जाँच करने और किसी भी विशेष कैरेक्टर को एनकोड करने की आदत डालें (आप URL Encoder का इस्तेमाल कर सकते हैं)।
- उपयुक्त होने पर URL शॉर्टनर का इस्तेमाल करें। UTM पैरामीटर लिंक को लंबा बना सकते हैं और उन पर क्लिक करना अनाकर्षक लग सकता है। अगर आप अपने लिंक सार्वजनिक रूप से दिखा रहे हैं, जैसे किसी सोशल मीडिया बायो में या किसी ट्रेड शो, बिज़नेस एक्सपो या प्रदर्शनी में ट्रैफ़िक और बिक्री ट्रैक करने के लिए डिस्प्ले पर, तो उन्हें छोटा करने के लिए bit.ly जैसे किसी URL शॉर्टनर का इस्तेमाल करें।
जब इसे सही ढंग से लागू किया जाता है, तो आप गूगल एनालिटिक्स और अन्य रिपोर्टिंग टूल में अलग-अलग स्रोतों से आने वाले ट्रैफ़िक को समूहबद्ध और विश्लेषित कर सकते हैं।

User-ID के साथ डिवाइसों में यूज़र की यात्रा को समूहबद्ध करना
सही UTM ट्रैकिंग सही दिशा में एक कदम है, लेकिन डिफ़ॉल्ट रूप से, अगर वही यूज़र कई डिवाइसों पर आपकी साइट पर आता है, तो हर "विज़िट" को एक अलग यूज़र और एक अलग "यात्रा" के रूप में दर्ज किया जाएगा।
उदाहरण के लिए, अगर कोई यूज़र किसी प्रोडक्ट के बारे में कोई इंस्टाग्राम स्टोरी देखता है, तो वह प्रोडक्ट को देख सकता है मगर उसे तुरंत नहीं खरीदता। इसके बजाय, वह घर जाते समय अपने फ़ोन पर प्रोडक्ट के बारे में रिसर्च कर सकता है, और फिर सोने से पहले अपने लैपटॉप पर उसे दोबारा सर्च करके किसी गूगल शॉपिंग विज्ञापन पर कन्वर्ट कर सकता है।
इससे निपटने और एक ही यूज़र से आने वाले सभी व्यवहार को समूहबद्ध करने के लिए, आपको गूगल एनालिटिक्स में User-ID सक्षम करनी होगी और अपने CRM को इंटीग्रेट करना होगा।
गूगल एनालिटिक्स में User-ID हर यूज़र के लिए यूनीक नॉन-PII (व्यक्तिगत रूप से पहचान योग्य नहीं) ID बनाती है, जो वहाँ शामिल हो जाती है जहाँ से भी उनका डेटा भेजा जाता है। फिर आप हर ग्राहक के लिए इस ID का इस्तेमाल करके अलग-अलग डिवाइसों के साथ-साथ ऑनलाइन और ऑफ़लाइन टचपॉइंट पर हुए इंटरैक्शन को एकीकृत कर सकते हैं।
अलग-अलग डिवाइसों पर जो कई स्वतंत्र यूज़र यात्राओं जैसा दिख सकता है, उसे एक ही यूज़र द्वारा आपके ब्रांड के साथ किए गए इंटरैक्शन की एक श्रृंखला में बदलने की क्षमता इस बात की स्पष्ट तस्वीर बनाने के लिए बेहद ज़रूरी है कि आपके ग्राहक अलग-अलग डिवाइसों और कैम्पेन में आपके साथ कैसे जुड़ते हैं।
7 मार्केटिंग एट्रिब्यूशन मॉडल

आमतौर पर सात अलग-अलग प्रकार के मार्केटिंग एट्रिब्यूशन मॉडल माने जाते हैं, जिनमें से आप अपने बिज़नेस के लक्ष्यों और फ़नल में किस जगह सबसे ज़्यादा महत्व देना चाहते हैं, इसके आधार पर चुन सकते हैं:
- लास्ट क्लिक
- फ़र्स्ट क्लिक
- लास्ट नॉन-डायरेक्ट क्लिक
- लीनियर
- टाइम डिके
- पोज़िशन-आधारित
- एल्गोरिदमिक (कस्टम)‘
आपके मार्केटिंग टचपॉइंट में हर एट्रिब्यूशन मॉडल को समझने में मदद करने के लिए नीचे हर मॉडल का विवरण दिया गया है। ध्यान दें कि इस्तेमाल किए गए मॉडल के आधार पर बिल्कुल एक ही ग्राहक यात्रा को अलग-अलग तरीके से कैसे समझा जा सकता है।
1. लास्ट क्लिक एट्रिब्यूशन

लास्ट-क्लिक एट्रिब्यूशन सबसे आम तौर पर इस्तेमाल किया जाने वाला मॉडल है और अधिकांश मार्केटिंग प्लेटफ़ॉर्म और मार्केटिंग एट्रिब्यूशन टूल के लिए यह डिफ़ॉल्ट होता है। यह सिंगल-टच मॉडल तब उपयोगी होता है जब आप आक्रामक रूप से ट्रैफ़िक को ग्राहकों में बदलने की कोशिश कर रहे हों।
यह कन्वर्ज़न का 100% श्रेय आख़िरी बार क्लिक किए गए विज्ञापन और उससे जुड़े कीवर्ड को देता है। इस तरह, लोअर-फ़नल कैम्पेन, जैसे ब्रांडेड सर्च या रिटारगेटिंग कैम्पेन, को ज़्यादा महत्व दिया जाएगा, जबकि ब्रांड जागरूकता और अपर-फ़नल कैम्पेन को शायद कोई श्रेय न मिले।
2. फ़र्स्ट क्लिक एट्रिब्यूशन

यह सिंगल-टच एट्रिब्यूशन मॉडल पहले टचपॉइंट को सबसे महत्वपूर्ण मानता है, क्योंकि ग्राहकों को सबसे पहले आपके फ़नल में लाने का 100% श्रेय उसे मिलता है। यह तब उपयोगी होता है जब आप उन कैम्पेन पर पैसा खर्च करने को प्राथमिकता दे रहे हों जो ट्रैफ़िक बढ़ाते हैं और नए दर्शक खोजते हैं।
यह कन्वर्ज़न का सारा श्रेय उस विज्ञापन या संबंधित कीवर्ड को देता है जिसे पहला क्लिक मिलता है। इस तरह, फ़नल के नीचे की उच्च-मूल्य वाली गतिविधियाँ, जैसे रीमार्केटिंग, इस मॉडल में छूट जाती हैं, जिससे संभावित रूप से इन प्रयासों में निवेश कम हो सकता है, जो असल में आपके कुल कन्वर्ज़न और टॉप-लाइन राजस्व को घटा देता है।
3. लास्ट नॉन-डायरेक्ट क्लिक एट्रिब्यूशन

लास्ट नॉन-डायरेक्ट क्लिक मॉडल किसी खरीदार के सीधे आपके स्टोर पर खरीदारी करने आने से पहले के आख़िरी क्लिक इवेंट को श्रेय देता है। यह आख़िरी, नॉन-डायरेक्ट टचपॉइंट को 100% श्रेय देता है।
ऊपर दिए गए उदाहरण में, वह ईमेल होगा।
डायरेक्ट ट्रैफ़िक अक्सर उन ग्राहकों से आता है जो किसी दूसरे चैनल पर हुई मार्केटिंग की वजह से पहले ही खरीदारी का फ़ैसला कर चुके होते हैं। लास्ट नॉन-डायरेक्ट क्लिक एट्रिब्यूशन आपको डायरेक्ट ट्रैफ़िक को छानकर अलग करने और कन्वर्ज़न से पहले की आख़िरी मार्केटिंग गतिविधि पर ध्यान केंद्रित करने में मदद करता है।
लास्ट नॉन-डायरेक्ट क्लिक एट्रिब्यूशन का इस्तेमाल करते हुए, आपको पता चलता है कि अंतिम कन्वर्ज़न दरअसल ईमेल ने ही चलाया था। इस मॉडल में डायरेक्ट तभी एक श्रेय-प्राप्त चैनल होगा जब ग्राहक का एकमात्र ट्रैक करने योग्य इवेंट सीधे आपके स्टोर पर आना हो।
4. लीनियर एट्रिब्यूशन

लीनियर एट्रिब्यूशन मॉडल कन्वर्ज़न के श्रेय को ग्राहक के खरीदारी के रास्ते में हुए सभी क्लिकों में बराबर बाँट देता है। यह मल्टी-टच एट्रिब्यूशन का सबसे सरल रूप है। इस मॉडल के साथ, आप किसी भी इंटरैक्शन को श्रेय देने से नहीं चूकते। हालांकि, यह आपको ठीक-ठीक नहीं बताता कि किस मार्केटिंग चैनल का सबसे ज़्यादा असर रहा।
5. टाइम डिके एट्रिब्यूशन

टाइम डिके एट्रिब्यूशन मॉडल लास्ट क्लिक के समान है। हालांकि, यह कन्वर्ज़न तक पहुँचाने वाले इंटरैक्शन को भी कुछ श्रेय देता है, जिसमें उन क्लिकों को ज़्यादा वज़न दिया जाता है जो समय के लिहाज़ से कन्वर्ज़न के नज़दीक हुए होते हैं।
6. पोज़िशन-आधारित एट्रिब्यूशन

पोज़िशन-आधारित (या U-आकार वाला) एट्रिब्यूशन मॉडल पहले और आख़िरी क्लिक को बराबर वज़न देता है, इनमें से हर इंटरैक्शन को 40% श्रेय मिलता है। बाकी 20% बीच के दूसरे क्लिकों में बाँट दिया जाता है।
हालांकि, यहाँ यह मान लिया जाता है कि पहला और आख़िरी क्लिक सबसे मूल्यवान इंटरैक्शन हैं, जबकि बीच में कुछ ऐसे कैम्पेन या टचपॉइंट भी हो सकते हैं जो एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
7. एल्गोरिदमिक एट्रिब्यूशन

इस मॉडल को अक्सर कस्टम एट्रिब्यूशन कहा जाता है। जब आपके पास पर्याप्त डेटा उपलब्ध होता है, तो आप मशीन लर्निंग को यह तय करने दे सकते हैं कि किसी ग्राहक की यात्रा में किन टचपॉइंट को सबसे ज़्यादा श्रेय मिलना चाहिए।
सैद्धांतिक रूप से, यह सबसे बढ़िया मॉडल है, लेकिन यह इस बात पर निर्भर करता है कि मशीन लर्निंग के लिए अलग-अलग टचपॉइंट में वज़न बाँटने हेतु पर्याप्त ऐतिहासिक डेटा मौजूद हो।
प्लेटफ़ॉर्म के बीच एट्रिब्यूशन मॉडल में अंतर
जब आप गूगल ऐड्स, फ़ेसबुक ऐड्स, गूगल एनालिटिक्स, या Shopify रिपोर्ट में मार्केटिंग एट्रिब्यूशन की जाँच करते हैं, तो आपको कुछ विसंगतियाँ नज़र आ सकती हैं। इनमें से सच का स्रोत कौन-सा है? तकनीकी रूप से, सभी "सही" हैं, बस वे मार्केटिंग को अलग-अलग नज़रिए से देखते हैं। यहाँ इस बात का एक परिचय दिया गया है कि हर एक कैसे काम करता है।
Shopify (शॉपिफाई)

Shopify की चैनल परफ़ॉर्मेंस रिपोर्ट में, मार्केटिंग एट्रिब्यूशन मॉडल आपको कन्वर्ज़न तक की आपके ग्राहकों की यात्रा की एक समग्र समझ देते हैं। इस रिपोर्ट के ज़रिए, आप अपने पसंदीदा एट्रिब्यूशन मॉडल पर टॉगल कर सकते हैं:
- लास्ट क्लिक के आधार पर कन्वर्ज़न
- लास्ट नॉन-डायरेक्ट क्लिक के आधार पर कन्वर्ज़न
- फ़र्स्ट क्लिक के आधार पर कन्वर्ज़न
Shopify के मार्केटिंग इनसाइट्स टूल और रिपोर्ट आपको अपने बिज़नेस को बेहतर ढंग से समझने में मदद करते हैं। एक नज़र में इनसाइट्स देखें, मार्केटिंग चैनल के प्रदर्शन का विश्लेषण करें और वह एट्रिब्यूशन मॉडल चुनें जो आपके बिज़नेस के लिए सबसे अच्छा हो।
Google Ads (गूगल एड्स)
गूगल ऐड्स केवल गूगल ऐड्स ट्रैफ़िक को ट्रैक करता है। यह अलग-अलग प्लेटफ़ॉर्म पर चल रहे दूसरे विज्ञापन कैम्पेन से आने वाले कन्वर्ज़न को डुप्लिकेट हटाकर अलग नहीं करता, क्योंकि यह उन टचपॉइंट को "देख" नहीं पाता। इसके बजाय, यह किसी भी ऐसे यूज़र का श्रेय लेगा जो किसी भी समय किसी गूगल कैम्पेन को छूता है, भले ही वह बाद में फ़ेसबुक/इंस्टाग्राम, ईमेल को छुए या सीधे आपकी वेबसाइट पर आकर कन्वर्ट हो जाए।
डिफ़ॉल्ट रूप से, गूगल ऐड्स एट्रिब्यूशन विंडो सेटिंग लास्ट-क्लिक एट्रिब्यूशन का इस्तेमाल करते हुए आपके विज्ञापनों पर क्लिक करने के 30 दिनों के भीतर की गई कार्रवाइयों को दिखाती है।
Facebook Ads (फेसबुक एड्स)
मेटा विज्ञापन प्लेटफ़ॉर्म केवल फ़ेसबुक विज्ञापन ट्रैफ़िक और इंटरैक्शन को ट्रैक करता है (जिसमें इंस्टाग्राम जैसी मेटा के स्वामित्व वाली प्रॉपर्टी भी शामिल हैं)।
यह भी अलग-अलग प्लेटफ़ॉर्म पर चल रहे दूसरे विज्ञापन कैम्पेन के डेटा को डुप्लिकेट हटाकर अलग नहीं करता और किसी भी ऐसे यूज़र का श्रेय लेगा जो एक निश्चित समयावधि के भीतर कोई फ़ेसबुक विज्ञापन देखता या उस पर क्लिक करता है, भले ही वह बाद में किसी गूगल ऐड्स कैम्पेन या ईमेल के साथ इंटरैक्ट करे, या सीधे आपकी वेबसाइट पर आकर कन्वर्ट हो जाए।
फ़ेसबुक डिफ़ॉल्ट रूप से लास्ट-क्लिक एट्रिब्यूशन का इस्तेमाल करता है, जिसमें आपका विज्ञापन देखने के 24 घंटों के भीतर और आपके विज्ञापन पर क्लिक करने के 28 दिनों के भीतर की एट्रिब्यूशन विंडो होती है।
फ़ेसबुक ऐड्स ज़्यादा विस्तृत विज्ञापन प्लेटफ़ॉर्मों में अकेला ऐसा है जो उन यूज़र का श्रेय लेगा जो संभवतः किसी विज्ञापन को "देखते" हैं (बिना क्लिक किए भी) और किसी दूसरे तरीके से कन्वर्ट हो जाते हैं। अगर आप प्लेटफ़ॉर्मों के बीच अपने नतीजों की बेहतर तुलना करना चाहते हैं, तो यह सलाह दी जाती है कि आप सेटिंग को क्लिक-आधारित कर दें।
Google Analytics (गूगल एनालिटिक्स)
गूगल एनालिटिक्स और दूसरे एनालिटिक्स प्लेटफ़ॉर्म अलग-अलग पेड और अनपेड चैनलों में क्लिक करने योग्य कार्रवाइयों को ट्रैक करते हैं। आमतौर पर, एनालिटिक्स प्लेटफ़ॉर्मों को इस तरह कॉन्फ़िगर किया जा सकता है कि वे बाहरी/ऑफ़लाइन डेटा स्रोत, User-ID और/या ऐसी अन्य वेब प्रॉपर्टी से जुड़ सकें जो सीधे आपके ऑनलाइन स्टोर का हिस्सा नहीं हैं।
गूगल एनालिटिक्स एक डेटा इम्पोर्ट सुविधा देता है जो आपको दूसरे स्रोतों से डेटा अपलोड करने देता है, ताकि आप उन सबका विश्लेषण गूगल एनालिटिक्स में कर सकें। अतिरिक्त डेटा स्रोत जोड़ना और User-ID को शामिल करना प्लेटफ़ॉर्मों में अपने अधिकांश ग्राहक इंटरैक्शन को एक ही जगह शामिल करने के सबसे अच्छे तरीके हैं।
गूगल एनालिटिक्स सभी चैनलों से आने वाले कन्वर्ज़न के डुप्लिकेट भी हटाएगा और किसी कन्वर्ज़न यात्रा के आख़िरी टचपॉइंट को श्रेय देगा, बशर्ते वह आपकी साइट पर सीधा विज़िट न हो। उस स्थिति में, यह आख़िरी नॉन-डायरेक्ट टचपॉइंट को श्रेय देगा।
ऐड सर्वर और इम्प्रेशन-आधारित एट्रिब्यूशन के बारे में
हालांकि अधिकांश एट्रिब्यूशन क्लिक-आधारित होता है, फिर भी इम्प्रेशन-आधारित एट्रिब्यूशन और रिपोर्टिंग भी संभव है।
अपने खुद के अनुभव के बारे में सोचें। क्या आप हर उस विज्ञापन पर क्लिक करते हैं जो आपकी रुचि जगाता है? जब आप ऐसा नहीं भी करते, तब भी वे विज्ञापन भविष्य में कोई प्रोडक्ट खरीदने के आपके फ़ैसले को प्रभावित कर सकते हैं।
एक ऐड सर्वर आपको अपने सभी मार्केटिंग डेटा को एक ही प्लेटफ़ॉर्म पर एकीकृत करने और डुप्लिकेट हटाने देता है, साथ ही आपको इम्प्रेशन-स्तर के डेटा तक पहुँच भी देता है। यह डेटा आपको अपने ग्राहक के खरीदारी के रास्ते और यह कि आपको किन चैनलों में निवेश करना चाहिए, को ज़्यादा स्पष्ट रूप से देखने देता है।
उदाहरण के लिए, क्लिक स्तर पर आपको अपने सर्च विज्ञापनों से शानदार प्रदर्शन दिख सकता है। हालांकि, जब आप इम्प्रेशन-स्तर का डेटा देखते हैं, तो आपको पता चलता है कि जो लोग सर्च पर कन्वर्ट होते हैं, वे असल में उससे पहले Youtube (यूट्यूब) पर एक वीडियो विज्ञापन देख चुके थे और बाद में उन्होंने गूगल पर आपका प्रोडक्ट सर्च किया।
गूगल मार्केटिंग प्लेटफ़ॉर्म इस तरह की तकनीक का एक उदाहरण है, जहाँ आप सर्च, वीडियो, डिस्प्ले, Gmail-प्रायोजित विज्ञापन और कुछ सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म जैसे चैनलों के लिए इम्प्रेशन-स्तर के डेटा तक पहुँच पा सकते हैं।
अपने मार्केटिंग के पैसे को काम में लाने के लिए एट्रिब्यूशन को समझें

मार्केटिंग एट्रिब्यूशन के परिदृश्य, उसमें मौजूद कमियों, और जिन अलग-अलग मॉडलों को आप लागू कर सकते हैं, उन्हें समझना बेहतर ट्रैकिंग, साफ़-सुथरे ग्राहक डेटाबेस और समझदारी भरे फ़ैसले लेने की दिशा में एक अच्छा पहला कदम है। मार्केटिंग एट्रिब्यूशन के लगातार जटिल होते जाने के बावजूद, इसके कई फ़ायदों से इनकार नहीं किया जा सकता।
मार्केटिंग एट्रिब्यूशन इस बारे में अनमोल जानकारी दे सकता है कि ग्राहक खरीदारी करने के अपने रास्ते में आपके ब्रांड के साथ कैसे और कहाँ इंटरैक्ट कर रहे हैं। यह एट्रिब्यूशन डेटा ROI को अधिकतम करने के लिए मार्केटिंग कैम्पेन और आपकी समग्र मार्केटिंग रणनीति को आकार देने में मदद कर सकता है।
मार्केटिंग एट्रिब्यूशन से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
मार्केटिंग में एट्रिब्यूशन के 4 प्रकार कौन-से हैं?
मार्केटिंग में सबसे लोकप्रिय एट्रिब्यूशन मॉडल में शामिल हैं:
- लास्ट-क्लिक एट्रिब्यूशन मॉडल: इस प्रकार का एट्रिब्यूशन यूज़र के खरीदारी करने से पहले की यात्रा के आख़िरी टचपॉइंट को श्रेय देता है।
- फ़र्स्ट-क्लिक एट्रिब्यूशन मॉडल: इस प्रकार का एट्रिब्यूशन यूज़र के खरीदारी करने से पहले की यात्रा के पहले टचपॉइंट को श्रेय देता है।
- लीनियर एट्रिब्यूशन मॉडल: इस प्रकार का एट्रिब्यूशन यूज़र के खरीदारी करने से पहले की यात्रा के सभी टचपॉइंट को बराबर श्रेय देता है।
- टाइम-डिके एट्रिब्यूशन मॉडल: इस प्रकार का एट्रिब्यूशन खरीदारी के समय के नज़दीक वाले टचपॉइंट को ज़्यादा श्रेय देता है।
मार्केटिंग एट्रिब्यूशन क्यों ज़रूरी है?
मार्केटिंग एट्रिब्यूशन इसलिए ज़रूरी है क्योंकि यह मार्केटर्स को अपने कैम्पेन की प्रभावशीलता मापने और ग्राहक यात्रा को ट्रैक करने देता है। एट्रिब्यूशन मार्केटर्स को यह समझने में मदद करता है कि कौन-से मार्केटिंग चैनल और गतिविधियाँ कन्वर्ज़न और ग्राहक जुड़ाव चला रहे हैं और कौन-से नहीं। इस डेटा का इस्तेमाल भविष्य की मार्केटिंग रणनीतियों के बारे में जानकारीपूर्ण फ़ैसले लेने, बजट को ज़्यादा प्रभावी ढंग से आवंटित करने और अपने पूरे सेल्स साइकिल में बेहतर प्रदर्शन के लिए कैम्पेन को ऑप्टिमाइज़ करने में किया जा सकता है।
मार्केटिंग एट्रिब्यूशन क्या है?
मार्केटिंग एट्रिब्यूशन बिक्री या लीड का श्रेय ग्राहक यात्रा के अलग-अलग टचपॉइंट को देने की प्रक्रिया है। यह इस बात का विश्लेषण करने का अभ्यास है कि किसी ग्राहक के खरीदारी करने या कार्रवाई करने के फ़ैसले पर हर टचपॉइंट या मार्केटिंग गतिविधि का क्या असर पड़ा। आपकी पसंद के आधार पर, ग्राहक यात्रा के अलग-अलग हिस्सों को श्रेय देने के लिए अलग-अलग एट्रिब्यूशन मॉडल मौजूद हैं।
मार्केटिंग एट्रिब्यूशन कैसे सेट करें?
- लक्ष्य तय करें: सबसे पहले उन लक्ष्यों को तय करें जिन्हें आप ट्रैक और मापना चाहते हैं। ये बिक्री से लेकर वेबसाइट विज़िट, लीड जनरेशन और बहुत कुछ हो सकते हैं।
- एक एट्रिब्यूशन मॉडल चुनें: अगला, एक ऐसा एट्रिब्यूशन मॉडल चुनें जो आपके बिज़नेस लक्ष्यों और उद्देश्यों को सबसे अच्छी तरह दर्शाता हो। चुनने के लिए कई एट्रिब्यूशन मॉडल हैं, जिनमें लास्ट क्लिक, फ़र्स्ट क्लिक, लीनियर और टाइम डिके शामिल हैं।
- ट्रैकिंग लागू करें: हर मार्केटिंग चैनल और गतिविधि के प्रदर्शन को मापने के लिए ट्रैकिंग सिस्टम सेट करें। इसमें वेबसाइट एनालिटिक्स, ईमेल मार्केटिंग, या कोई भी दूसरा प्लेटफ़ॉर्म या सॉफ़्टवेयर शामिल हो सकता है जिसका आप इस्तेमाल करते हैं।
- रिपोर्टिंग सेट करें: अपने रिपोर्टिंग सिस्टम को इस तरह कॉन्फ़िगर करें कि आप डेटा को ऐसे रूप में देख सकें जो फ़ैसले लेने के लिए उपयोगी हो। इसमें संभवतः डैशबोर्ड सेट करना, रिपोर्टिंग टेम्पलेट बनाना और बहुत कुछ शामिल होगा।
- निगरानी करें और समायोजित करें: रुझानों और सुधार के क्षेत्रों की पहचान करने के लिए समय के साथ डेटा की निगरानी करें। ज़रूरत के मुताबिक अपने कैम्पेन और रणनीतियों में बदलाव करें।

