अलाबामा के टस्कालूसा जैसे शहर में एक औसत बिलबोर्ड की कीमत लगभग हर महीने ₹1,80,000 होती है। अगर आप एक बिलबोर्ड खरीदते हैं और शहर के सभी 100,000 लोग उसे एक महीने में देख लें, तो प्रति इम्प्रेशन आपकी लागत ₹ 180 पड़ेगी, जो बुरी नहीं है। अब सोचिए, आप दुनिया के सबसे बड़े सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म, Facebook (फेसबुक), पर एक पोस्ट प्रकाशित करते हैं और उसके 2.96 अरब उपयोगकर्ता उसे देख लेते हैं। तब हर इम्प्रेशन की लागत इससे भी कम होगी, क्योंकि ऑर्गेनिक Facebook (फेसबुक) पोस्ट फ्री होती हैं।
बेशक, इनमें से कोई भी स्थिति पूरी तरह से असली नहीं है—टस्कालूसा में हर कोई बिलबोर्ड नहीं देखेगा, और Facebook (फेसबुक) पर हर कोई पोस्ट नहीं देखेगा। फिर भी, यह तुलना आपको सोशल मीडिया मार्केटिंग की ताकत और दायरे का अंदाज़ा देती है। अगर सही रणनीति के साथ किया जाए, तो एक सोशल मीडिया पोस्ट ज़्यादातर दूसरी मार्केटिंग रणनीतियों के मुकाबले कम खर्च में ज़्यादा लोगों तक पहुँच सकती है। सोशल मीडिया मार्केटिंग में क्या-क्या शामिल है, और आप इसकी शुरुआत कैसे कर सकते हैं, इसे नीचे बताया गया है।
सोशल मीडिया मार्केटिंग क्या है?
सोशल मीडिया मार्केटिंग वह प्रक्रिया है जिसमें सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म का उपयोग करके अपने प्रोडक्ट या सेवाओं का प्रचार किया जाता है, ब्रांड जागरूकता बढ़ाई जाती है, ऑडियंस के साथ जुड़ाव बनाया जाता है, और वेबसाइट ट्रैफ़िक बढ़ाया जाता है। इसमें अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर उच्च गुणवत्ता वाला कंटेंट प्रकाशित करना, सोशल मीडिया ऐड चलाना, टिप्पणियों और संदेशों का जवाब देना, और सोशल मीडिया मेट्रिक्स को ट्रैक व विश्लेषित करना शामिल है। सोशल मीडिया मार्केटिंग के लिए सबसे आम प्लेटफ़ॉर्म हैं, Facebook (फेसबुक), Instagram (इंस्टाग्राम), YouTube (यूट्यूब) और LinkedIn (लिंक्डइन)।
सोशल मीडिया मार्केटिंग के आधार
सोशल मीडिया मार्केटिंग के पाँच मुख्य तत्व होते हैं:
- रणनीति। आपकी सोशल मीडिया मार्केटिंग रणनीति में आपके लक्ष्य, टारगेट ऑडियंस, मुख्य प्लेटफ़ॉर्म और सोशल-विशिष्ट कंटेंट रणनीति शामिल होगी। सरल शब्दों में, यह तय करती है कि आपकी कंपनी क्यों, कहाँ और क्या पोस्ट करेगी, और किन मेट्रिक्स को ट्रैक किया जाएगा।
- पब्लिशिंग। पब्लिशिंग वह प्रक्रिया है जिसके ज़रिए आप अपना सोशल कंटेंट बनाते हैं और उसे ऑडियंस तक पहुँचाते हैं। इसमें यह तय किया जाता है कि कितनी बार पोस्ट करना है, कब पोस्ट करना है, और इस काम के लिए किन पब्लिशिंग व शेड्यूलिंग टूल्स की ज़रूरत होगी।
- कम्युनिटी मैनेजमेंट। सोशल मीडिया मार्केटिंग आपको ऑडियंस से सीधे जुड़ने का मौका देती है। आप अपनी पोस्ट पर आए कमेंट्स को लाइक या उनका जवाब दे सकते हैं, सोशल मीडिया साइट्स पर अपनी कंपनी के उल्लेख पर नज़र रख सकते हैं, और उपयोगकर्ताओं के डायरेक्ट मैसेज का जवाब दे सकते हैं।
- विज्ञापन। सोशल मीडिया पर हर पोस्ट को दो श्रेणियों में रखा जा सकता है, पेड या ऑर्गेनिक कंटेंट। ऑर्गेनिक कंटेंट पोस्ट करना फ्री होता है, और उसकी पहुँच आपके फ़ॉलोअर्स की संख्या और प्लेटफ़ॉर्म के एल्गोरिदम पर निर्भर करती है। पेड कंटेंट, या सोशल मीडिया विज्ञापन, बिज़नेस को यह सुविधा देता है कि वे प्लेटफ़ॉर्म को भुगतान करके अपनी पोस्ट अधिक लोगों तक पहुँचाएँ और खास ऑडियंस को लक्षित करें।
- एनालिटिक्स। सोशल मीडिया एनालिटिक्स उन तरीकों का समूह है जिनका उपयोग आप सोशल मीडिया अभियानों की प्रभावशीलता मापने के लिए करते हैं। इसमें आपके अकाउंट या पोस्ट की पहुँच, व्यूज़, एंगेजमेंट, क्लिक और उल्लेख जैसे मेट्रिक्स को ट्रैक करना, देखना और विश्लेषित करना शामिल है।
छोटे बिजनेस के लिए सोशल मीडिया मार्केटिंग के फायदे और नुकसान
सोशल मीडिया मार्केटिंग हर तरह के बिज़नेस में लोकप्रिय है, 96% से अधिक छोटे बिज़नेस और 97% फॉर्च्यून 500 कंपनियाँ अपनी मार्केटिंग रणनीति में सोशल मीडिया चैनलों का उपयोग करती हैं। छोटे ईकॉमर्स बिज़नेस के लिए इसके प्रमुख फायदे और कुछ सीमाएँ नीचे दी गई हैं:
सोशल मीडिया मार्केटिंग के फायदे
- बिक्री में बढ़ोतरी। एक प्रभावी सोशल मीडिया मार्केटिंग अभियान लीड्स ला सकता है, ब्रांड पहचान बढ़ा सकता है और आपकी वेबसाइट पर ट्रैफ़िक भेज सकता है, और ये सभी चीज़ें बिक्री बढ़ाने में मदद करती हैं।
- निवेश पर अच्छा रिटर्न (ROI)। ऑर्गेनिक सोशल मीडिया मार्केटिंग किफायती हो सकती है, क्योंकि सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर पोस्ट करने की लागत लगभग शून्य होती है, खासकर तब जब इसकी तुलना बिलबोर्ड और प्रिंट विज्ञापनों जैसे पारंपरिक चैनलों की अधिक लागत और सीमित पहुँच से की जाए।
- बेहतर ग्राहक संबंध। बिजनेस सोशल नेटवर्क्स का उपयोग करके मौजूदा और संभावित ग्राहकों से सीधे बात कर सकते हैं, उनकी चिंताओं का समाधान कर सकते हैं और सवालों का तुरंत जवाब दे सकते हैं। सकारात्मक बातचीत ग्राहक संबंधों को मजबूत करती है और ब्रांड की छवि बेहतर बनाती है।
सोशल मीडिया मार्केटिंग के नुकसान
- समय अधिक लग सकता है। कई प्लेटफ़ॉर्म पर मजबूत सोशल मीडिया उपस्थिति बनाना समय मांगता है। उदाहरण के लिए, आपके लक्ष्यों के अनुसार आपको हर मुख्य प्लेटफ़ॉर्म पर सप्ताह में 20 से अधिक पोस्ट बनानी और प्रकाशित करनी पड़ सकती हैं, और कम्युनिटी मैनेजमेंट के लिए रोज़ अतिरिक्त दो घंटे देने पड़ सकते हैं।
- विविध और विशेषज्ञ कौशल की ज़रूरत होती है। एक आदर्श सोशल मीडिया मैनेजर को ग्राफिक डिज़ाइन, फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, कंटेंट लेखन और ग्राहक सेवा की अच्छी समझ होनी चाहिए। साथ ही, उसे हर प्लेटफ़ॉर्म की सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों और सोशल मीडिया ट्रेंड की जानकारी भी होनी चाहिए। छोटे बिज़नेस के लिए यह सब कौशल घर के भीतर जुटाना कठिन हो सकता है, और फ्रीलांसर या एजेंसी की मदद लेना महंगा पड़ सकता है।
- हर ऑडियंस तक नहीं पहुँच पाएगा। सोशल मीडिया मार्केटिंग केवल सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं तक पहुँचती है। अगर आपकी ऑडियंस कहीं और है, तो कोई दूसरा मार्केटिंग तरीका चुनना बेहतर होगा।
सफल सोशल मीडिया मार्केटिंग रणनीति कैसे बनाएं
- अपना बजट और लक्ष्य तय करें
- अपनी टारगेट ऑडियंस पहचानें
- प्रतिस्पर्धियों का अध्ययन करें
- सोशल मीडिया साइट्स चुनें
- अपना सोशल मीडिया ब्रांड तय करें
- कंटेंट रणनीति बनाएं
प्रभावी कंटेंट मार्केटिंग की शुरुआत एक स्पष्ट योजना से होती है। अपनी सोशल मीडिया मार्केटिंग रणनीति छह चरणों में इस तरह बनाएं:
1. अपना बजट और लक्ष्य तय करें
सोशल मीडिया मार्केटिंग योजना बनाने की शुरुआत आपके डिजिटल मार्केटिंग बजट की समीक्षा से होनी चाहिए। तय करें कि आप सोशल मीडिया मार्केटिंग के लिए कितना समय और पैसा दे सकते हैं, और आप कौन से लक्ष्य हासिल करना चाहते हैं। सोशल पोस्ट को प्रमोट करने, एजेंसी या फ्रीलांसर रखने, या किसी कर्मचारी से यह काम आंतरिक रूप से करवाने में लागत आ सकती है। ऐसे सोशल मीडिया लक्ष्य तय करें जो आपके बड़े बिज़नेस उद्देश्यों का समर्थन करें और आपके बजट के भीतर हासिल किए जा सकें।
उदाहरण के लिए, अगर आपके बिजनेस लक्ष्यों में से एक अगले कैलेंडर वर्ष में 10% अधिक लीड्स लाना है, तो आप उसी अवधि में गेटेड लैंडिंग पेजों पर ट्रैफ़िक 25% बढ़ाने का सोशल मीडिया लक्ष्य रख सकते हैं, यह समझते हुए कि वेबसाइट पर आने वाला हर व्यक्ति फ़ॉर्म भरकर लीड नहीं बनेगा। अगर आपका बजट बड़ा है, तो उपलब्ध अतिरिक्त मार्केटिंग संसाधनों को देखते हुए आप यह लक्ष्य 35% तक बढ़ा सकते हैं। अगर ऑर्गेनिक कंटेंट से परिणाम नहीं मिल रहे, तो लक्ष्य पाने के लिए आप पेड LinkedIn (लिंक्डइन) पोस्ट, Facebook (फेसबुक) विज्ञापन, या इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग रणनीतियाँ अपना सकते हैं।
2. अपनी टारगेट ऑडियंस पहचानें
ऑडियंस रिसर्च करके यह समझें कि सबसे लोकप्रिय सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर सक्रिय उपयोगकर्ताओं की जनसांख्यिकीय प्रोफ़ाइल क्या है। फिर अपनी सोशल मीडिया कोशिशों के लिए लक्षित ऑडियंस तय करें। जब आपको यह पता होता है कि आप किन लोगों तक पहुँचना चाहते हैं, और कौन-सी ऑडियंस किस प्लेटफ़ॉर्म पर सक्रिय है, तब यह तय करना आसान हो जाता है कि आपके बिज़नेस की उपस्थिति किन प्लेटफ़ॉर्म पर होनी चाहिए। उदाहरण के लिए, अगर आपकी टारगेट ऑडियंस 45 से 65 वर्ष के पुरुष हैं, तो आप अपनी सोशल मीडिया मार्केटिंग रणनीति Facebook (फेसबुक), YouTube (यूट्यूब) और Instagram (इंस्टाग्राम) पर केंद्रित कर सकते हैं, क्योंकि ये चैनल इस तरह की ऑडियंस में अधिक लोकप्रिय हैं।
3. प्रतिस्पर्धियों का अध्ययन करें
कई बार आप प्रतिस्पर्धी विश्लेषण करके ऑडियंस रिसर्च की प्रक्रिया तेज कर सकते हैं। मान लीजिए आपकी टारगेट ऑडियंस 25 से 45 वर्ष के ऐसे घर पर रहने वाले माता-पिता हैं जो पर्यावरण के प्रति सजग हैं और जिनके पास कुछ अतिरिक्त खर्च करने की क्षमता है। आप इस क्षेत्र में सफल प्रतिस्पर्धियों की पहचान ऑनलाइन समान ब्रांड खोजकर, अपने ग्राहकों से पूछकर, या सोशल मीडिया उल्लेख और फ़ॉलोअर संख्या देखकर कर सकते हैं। फिर देखें कि आपके प्रतिस्पर्धी किन सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर सक्रिय हैं और क्या उन्हें वहाँ लाइक और कमेंट मिल रहे हैं। अगर किसी खास प्लेटफ़ॉर्म पर कई प्रतिस्पर्धियों के बीच एक जैसा रुझान दिखे, तो आप मान सकते हैं कि आपकी टारगेट ऑडियंस वहाँ खास तौर पर सक्रिय है।
प्रतिस्पर्धी विश्लेषण आपको सफल कंटेंट प्रकार, ब्रांड विशेषताएँ और पब्लिशिंग की गति समझने में भी मदद करता है। आपको किसी दूसरी कंपनी की हूबहू नकल नहीं करनी चाहिए, लेकिन प्रतिस्पर्धी अध्ययन से यह समझ आता है कि आपके जैसे बिज़नेस के लिए क्या काम करता है। जब कंटेंट बनाने का समय आए, तो आप और आपकी क्रिएटिव टीम ऐसा कंटेंट तैयार कर सकते हैं जो आपके ब्रांड के लिए अलग दिखे, लेकिन प्रेरणा उन अच्छी बातों से ले जो आप प्रतिस्पर्धियों में देख रहे हैं।
4. सोशल मीडिया साइट्स चुनें
अपनी सोशल मीडिया मार्केटिंग रणनीति के लिए प्लेटफ़ॉर्म चुनते समय शुरुआत ऑडियंस से करें, और उन प्लेटफ़ॉर्म को हटा दें जो आपकी पहचानी गई टारगेट ऑडियंस की सेवा नहीं करते। इसके बाद फीचर्स, डिस्प्ले और अलग-अलग सोशल मीडिया नेटवर्क पर विभिन्न कंटेंट प्रकारों के प्रदर्शन पर विचार करें। उदाहरण के लिए, अगर आप प्रोडक्ट बेचना चाहते हैं, तो ऐसे प्लेटफ़ॉर्म पर ध्यान दें जिनमें ऐप के भीतर खरीदारी की सुविधा हो, जैसे Facebook (फेसबुक) या Instagram (इंस्टाग्राम)। अगर आप ब्लॉग पोस्ट या लेखों के लिंक साझा करना चाहते हैं, तो X (एक्स पहले ट्विटर) या LinkedIn (लिंक्डइन) जैसे प्लेटफ़ॉर्म उपयोगी हो सकते हैं, जो बाहरी लिंक से फीचर्ड इमेज खींच लेते हैं। आपकी सोशल मीडिया मार्केटिंग रणनीति में हर प्लेटफ़ॉर्म के लिए अलग-अलग तरीकों का संयोजन भी शामिल हो सकता है।
5. अपना सोशल मीडिया ब्रांड तय करें
हालाँकि आपका सोशल मीडिया कंटेंट आपकी मुख्य ब्रांड पहचान को दर्शाएगा, फिर भी आप अलग-अलग सोशल चैनलों के अनुसार विज़ुअल्स, टोन और आवाज़ में हल्का बदलाव रख सकते हैं। उदाहरण के लिए, आप X (एक्स पहले ट्विटर) पर थोड़ा हल्का या व्यंग्यात्मक अंदाज़ अपनाने की अनुमति दे सकते हैं, लेकिन LinkedIn (लिंक्डइन) पर कंटेंट को अधिक औपचारिक रख सकते हैं, क्योंकि वह प्लेटफ़ॉर्म मुख्य रूप से बिज़नेस नेटवर्किंग के लिए उपयोग होता है।
जब आपका सोशल मीडिया ब्रांड तय हो जाए, तो ब्रांड गाइडलाइंस बनाइए और उसमें प्लेटफ़ॉर्म-विशिष्ट अंतर भी दर्ज कीजिए। इससे आपका सोशल कंटेंट एकसमान और व्यवस्थित दिखेगा।
6. कंटेंट रणनीति बनाएं
अपने लक्ष्य, टारगेट ऑडियंस रिसर्च और प्रतिस्पर्धी विश्लेषण का उपयोग करके मुख्य विषय, पोस्ट के प्रकार, पब्लिशिंग की आवृत्ति और हर प्लेटफ़ॉर्म पर पोस्ट करने का सही समय तय करें। आकर्षक कंटेंट बनाने और ऑडियंस को जोड़े रखने के लिए प्रमोशनल कंटेंट पर बहुत अधिक निर्भर न हों। एक आम नियम यह कहता है कि प्रभावी सोशल मीडिया मार्केटिंग रणनीति में 80% कंटेंट जानकारी दे या मनोरंजन करे, और 20% कंटेंट सीधे आपकी कंपनी का प्रचार करे।
उदाहरण के लिए, मान लीजिए आपका मुख्य लक्ष्य अपनी दोबारा उपयोग की जा सकने वाली पानी की बोतलों की बिक्री बढ़ाना है। आपकी टारगेट ऑडियंस स्वास्थ्य और पर्यावरण के प्रति सजग है, और आपके प्रतिस्पर्धियों को वेलनेस पोस्ट और वीडियो कंटेंट पर अच्छा एंगेजमेंट मिलता है। ऐसे में आपकी कंटेंट रणनीति में प्लास्टिक की पानी की बोतलों के पर्यावरणीय नुकसान, डिस्पोज़ेबल प्लास्टिक के स्वास्थ्य जोखिम, और उपयोगी वेलनेस सुझावों से जुड़ा कंटेंट शामिल हो सकता है। यह कंटेंट छोटे वीडियो, आपके ब्लॉग के लंबे लेखों के अंश, और ब्रांडेड इन्फोग्राफिक्स के रूप में हो सकता है।
सोशल मीडिया मार्केटिंग मेट्रिक्स
मार्केटिंग टीमें सोशल मीडिया मेट्रिक्स का उपयोग अभियान के परिणामों का मूल्यांकन करने और सफल तरीकों की पहचान करने के लिए करती हैं, ताकि रणनीति में बदलाव कर बेहतर नतीजे हासिल किए जा सकें। नीचे ऐसे मेट्रिक्स दिए गए हैं जो उपयोगी जानकारी देते हैं:
- रीच। उन अलग-अलग लोगों की संख्या जिन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट देखी।
- इम्प्रेशंस। किसी पोस्ट को उपयोगकर्ताओं के सामने कुल कितनी बार दिखाया गया।
- एंगेजमेंट्स। किसी एक पोस्ट या पूरे अकाउंट पर मिले लाइक, कमेंट, क्लिक, शेयर या डायरेक्ट मैसेज की संख्या।
- एंगेजमेंट रेट। उन लोगों का प्रतिशत जिन्होंने पोस्ट देखने के बाद उससे जुड़ाव किया। इसका फॉर्मूला है: एंगेजमेंट रेट = पोस्ट एंगेजमेंट / पोस्ट रीच।
- एम्प्लिफिकेशन रेट। आपके कुल फ़ॉलोअर्स में से कितने प्रतिशत लोगों ने पोस्ट शेयर की। इसका फॉर्मूला है: एम्प्लिफिकेशन रेट = पोस्ट शेयर / कुल अकाउंट फ़ॉलोअर्स।
- क्लिक-थ्रू रेट। पोस्ट जितनी बार दिखाई गई, उनमें से कितनी बार लोगों ने उसमें दिए गए लिंक पर क्लिक किया। इसका फॉर्मूला है: क्लिक-थ्रू रेट = पोस्ट लिंक क्लिक / पोस्ट इम्प्रेशंस।
- अकाउंट व्यूज़। आपकी कंपनी की सोशल मीडिया प्रोफ़ाइल देखने वाले लोगों की संख्या।
- ऑडियंस ग्रोथ रेट। आपकी ऑडियंस कितनी तेज़ी से बढ़ रही है, इसका प्रतिशत आधारित माप। इसका फॉर्मूला है: ऑडियंस ग्रोथ रेट = (किसी निश्चित अवधि में नए शुद्ध फ़ॉलोअर्स / कुल फ़ॉलोअर्स) x 100।
- कॉस्ट-पर-क्लिक (CPC)। यह बताता है कि पोस्ट पर मिले हर क्लिक के लिए आप कितना भुगतान कर रहे हैं। इसका फॉर्मूला है: CPC = विज्ञापन खर्च / क्लिक की संख्या।
- कन्वर्ज़न रेट। उन लोगों का प्रतिशत जिन्होंने वांछित कार्रवाई की, जैसे प्रोडक्ट खरीदना या संपर्क फ़ॉर्म भरना। इसका फॉर्मूला है: कन्वर्ज़न रेट = इम्प्रेशंस की संख्या / वांछित कार्रवाई करने वाले लोगों की संख्या।
- निवेश पर रिटर्न (ROI)। सोशल मीडिया मार्केटिंग अभियान की लाभप्रदता का माप। इसका फॉर्मूला है: ROI = अभियान से जुड़ा लाभ / अभियान की कुल लागत।
- मेंशंस। सोशल प्लेटफ़ॉर्म पर उपयोगकर्ताओं ने आपकी कंपनी का कितनी बार उल्लेख किया।
- सोशल वॉइस का हिस्सा (SoSV)। आपके प्रतिस्पर्धियों की तुलना में आपकी कंपनी का उल्लेख कितनी बार हुआ, इसका प्रतिशत। इसका फॉर्मूला है: SoSV = (आपके ब्रांड के उल्लेखों की संख्या / प्रतिस्पर्धी ब्रांडों के उल्लेखों की संख्या) x 100।
- सोशल सेंटिमेंट। आपकी कंपनी के बारे में तटस्थ, सकारात्मक और नकारात्मक भावनाओं का वितरण। इसका फॉर्मूला है: सोशल सेंटिमेंट = (कुल सकारात्मक उल्लेख - कुल नकारात्मक उल्लेख) / कुल उल्लेख।
सोशल मीडिया मार्केटिंग से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सोशल मीडिया मार्केटर क्या करते हैं?
सोशल मीडिया मार्केटर सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर किसी कंपनी के प्रोडक्ट या सेवाओं का प्रचार करते हैं। वे सोशल मीडिया रणनीति बना सकते हैं, ट्रेंड पर नज़र रख सकते हैं, आकर्षक कंटेंट तैयार कर सकते हैं, पोस्ट शेड्यूल और प्रकाशित कर सकते हैं, और एनालिटिक्स को ट्रैक व विश्लेषित कर सकते हैं।
सोशल मीडिया पर किस तरह का कंटेंट सबसे अच्छा प्रदर्शन करता है?
हालाँकि हर प्लेटफ़ॉर्म की अपनी विशेषताएँ होती हैं, फिर भी नीचे दिए गए कंटेंट प्रकार आम तौर पर अच्छा प्रदर्शन करते हैं:
- शॉर्ट-फॉर्म वीडियो: YouTube (यूट्यूब) और Instagram (इंस्टाग्राम)
- उपयोगकर्ता-निर्मित कंटेंट: Instagram (इंस्टाग्राम), X (एक्स पहले ट्विटर), LinkedIn (लिंक्डइन) और Facebook (फेसबुक)
- कंपनी संस्कृति से जुड़ा कंटेंट: Facebook (फेसबुक), LinkedIn (लिंक्डइन) और X (एक्स पहले ट्विटर)
- उच्च गुणवत्ता वाली तस्वीरें: Pinterest (पिनटेरेस्ट), Instagram (इंस्टाग्राम) और Facebook (फेसबुक)
- इन्फोग्राफिक्स: X (एक्स पहले ट्विटर), Pinterest (पिनटेरेस्ट), Instagram (इंस्टाग्राम), LinkedIn (लिंक्डइन) और Facebook (फेसबुक)
बिजनेस अपने सोशल मीडिया मार्केटिंग कैंपेन की सफलता कैसे माप सकते हैं?
बिजनेस एंगेजमेंट, रीच, क्लिक-थ्रू रेट और कन्वर्ज़न जैसे सोशल मीडिया मेट्रिक्स को ट्रैक करके अपने सोशल मीडिया मार्केटिंग कैपेंन की सफलता मापते हैं और निवेश पर रिटर्न (ROI) की गणना करते हैं।
सोशल मीडिया मार्केटिंग में किन आम गलतियों से बचना चाहिए?
जो बिजनेस अभी शुरुआत कर रहे होते हैं, वे अक्सर ये सामान्य गलतियाँ करते हैं:
- टारगेट ऑडियंस के लिए गलत प्लेटफ़ॉर्म चुनना
- सोशल मीडिया मेट्रिक्स को ट्रैक न करना
- पर्याप्त नियमितता से पोस्ट न करना
- प्रमोशनल कंटेंट पर बहुत अधिक ज़ोर देना
- कम्युनिटी मैनेजमेंट की अनदेखी करना

